मेरी कहानी
मैं आकाश गुप्ता हूँ। बस्ती और गोंडा ज़िलों की पौराणिक मनोरमा नदी — एक समय पर जीवन का स्रोत, फिर गंदगी और प्रदूषण से लगभग मृत।
उत्तर प्रदेश के बस्ती और गोंडा ज़िले की पौराणिक मनोरमा नदी भारी गंदगी, जलकुंभी और प्लास्टिक कचरे से भरी हुई थी। पानी कोयले जैसा काला हो गया था — सड़ता कचरा, सैकड़ों किलो प्लास्टिक और नदी में बहुत सारी गंदी चीज़ें। नदी इतनी गंदी और बदबूदार थी कि यहाँ न जानवर दिखते थे, न इंसान।
जब मैंने नदी की सफ़ाई का काम शुरू किया, तब मैंने कभी नहीं सोचा था कि लगातार चार महीनों तक सफ़ाई करके नदी का 500 मीटर से ज़्यादा हिस्सा साफ़ कर दूँगा। आसपास के युवाओं ने भी धीरे-धीरे साथ दिया।
इस मेहनत को आप @myvillagevlogs12 पर वीडियो के ज़रिए भी देख सकते हैं — बिना सजावट, सीधे ज़मीन से।
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