Skip to content

मेरी कहानी

मैं आकाश गुप्ता हूँ। बस्ती और गोंडा ज़िलों की पौराणिक मनोरमा नदी — एक समय पर जीवन का स्रोत, फिर गंदगी और प्रदूषण से लगभग मृत।

आकाश गुप्ता · @myvillagevlogs12

उत्तर प्रदेश के बस्ती और गोंडा ज़िले की पौराणिक मनोरमा नदी भारी गंदगी, जलकुंभी और प्लास्टिक कचरे से भरी हुई थी। पानी कोयले जैसा काला हो गया था — सड़ता कचरा, सैकड़ों किलो प्लास्टिक और नदी में बहुत सारी गंदी चीज़ें। नदी इतनी गंदी और बदबूदार थी कि यहाँ न जानवर दिखते थे, न इंसान।

जब मैंने नदी की सफ़ाई का काम शुरू किया, तब मैंने कभी नहीं सोचा था कि लगातार चार महीनों तक सफ़ाई करके नदी का 500 मीटर से ज़्यादा हिस्सा साफ़ कर दूँगा। आसपास के युवाओं ने भी धीरे-धीरे साथ दिया।

इस मेहनत को आप @myvillagevlogs12 पर वीडियो के ज़रिए भी देख सकते हैं — बिना सजावट, सीधे ज़मीन से।

The Better India की पूरी कहानी पढ़ें

मनोरमा के सामने चुनौती

नदी सिर्फ़ एक समस्या से नहीं, बल्कि कई परतों की गंदगी से प्रभावित थी — जिसने पूरे इलाके को प्रभावित किया।

  • जलकुंभी और अवरुद्ध धारा

    पानी पर जलकुंभी की मोटी परत — धारा रुकी, पानी खड़ा और बदबूदार।

  • काला, प्रदूषित पानी

    पानी कोयले जैसा काला — सड़ता कचरा और गंदगी से भारी प्रदूषण।

  • प्लास्टिक और कचरा

    सैकड़ों किलो प्लास्टिक और नदी में फेंका गया अन्य कचरा।

  • जीवन का अभाव

    नदी इतनी गंदी और बदबूदार थी कि न जानवर, न इंसान पास आते थे।

ये विवरण अभियान शुरू होने से पहले की स्थिति पर आधारित हैं। आगे के सटीक माप उपलब्ध होने पर यहाँ जोड़े जाएँगे।